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Saturday, August 21, 2010

hindi sex stories:

मेरा पहला एहसास




मेरी उम्र १८ साल है, मैं कुंवारी युवती हूँ. मैंने 12th का exam दीया है. मैं अपने बारे में यह बताना जरूरी समझती हूँ की मेरी फमिल्य काफी advance है, और मुझे कीसी प्रकार की बंदीश नहीं लगायी जाती. मैं अपनी मरजी से जीना पसंद करती हूँ. अपने ही ढंग से fashionable कपडे पहन-ना मेरा शौक़ है. और क्योंकी मैं मम्मी पापा की इकलौती बेटी हूँ इसलिए कीसी ने भी मुझे इस तरह के कपडे पहन-ने से नहीं रोका. School आने जाने के लिए मुझे एक ड्राइवर के साथ कार मीली हुई थी. वैसे तो मम्मी मुझे ड्राइव करने से मन करती थी, मगर मैं अक्सर ड्राइवर को घूमने के लिए भेज देती और खुद ही कार लेकर सैर करने निकल जाती थी.





School में पढने वाला एक लड़का मेरा दोस्त था. उसके पास एक अच्छी सी bike थी. मगर वो कभी कभी ही bike लेकर आता था, जब भी वो bike लेकर आता मैं उसके पीछे बैठ कर उसके साथ घूमने जाती. और जब उसके पास bike नहीं होती तो मैं उसके साथ कार में बैठ कर घूमने का अनद उठाती. ड्राइवर को मैंने पैसे देकर मना कर रख्खा था की घर पर मम्मी या पापा को ना बताये की मैं अकेली कार लेकर अपने दोस्त के साथ घूमने जाती हूँ. इस प्रकार उसे दोहरा फायदा होता था, कै ओर तो उसे पैसे भी मील जाते थे और दूसरी ओर उसे अकेले घूमने का मौका भी मील जाया कर्ता था. दो बजे School से छुट्टी के बाद अक्सर मैं अपने दोस्त के साथ निकल जाती थी और करीब ६-७ बजते बजते घर पहुंच जाती थी. एक प्रकार से मेरा घूमना भी हो जाता था और घर वालो को कुछ कहने का मौका भी नहीं मिलता था.



मेरे दोस्त का नाम तो मैं बातन ही भूल गयी. उसका नाम वीनय है. वीनय को मैं मन ही मन प्यार करती थी और वीनय भी मुझसे प्यार कर्ता था, मगर ना तो मैंने कभी उससे प्यार का इजहार कीया और ना ही उसने. उसके साथ प्यार करने में मुझे कोई झीझक महसूस नहीं होती थी. मुझे याद है की प्यार की शुरुआत भी मैंने ही की थी जब हम दोनो bike में बैठ कर घूमने जा रहे थे. मैं पीछे बैठी हुई थी जब मैंने रोमांटिक बात करते हुए उसके गाल पर कीस कर लीया. ऐसा मैंने भावुक हो कर नहीं बल्की उसकी झीझक दूर करने के लिए किया था. वो इससे पहले प्यार की बात करने में भी बहुत झीझाकता था. एक बार उसकी झीझक दूर होने के बाद मुझे लगा की उसकी झिजहक दूर करके मैंने ठीक नहीं कीया. क्योंकी उसके बाद तो उसने मुझसे इतनी शरारत करनी शुरू कर दी की कभी तो मुझे मज़ा आ जाता था और कभी उस पर ग़ुस्सा. मगर कुल मीलाकर मुझे उसकी शरारत बहुत अच्छी लगती थी. उसकी इन्ही सब बातो के कारण मैं उसे पसंद करती थी और एक प्रकार से मैंने अपना तन मन उसके नाम कर दीया था.

एक दीन मैं उसके साथ कार में थी. कार वोही ड्राइव कर रह था. एकाएक एक सुनसान जगह देखकर उसने कार रोक दी और मेरी ओर देखते हुए बोला, “अच्छी जगह है ना ! चारो तरफ अँधेरा और पड पौधे हैं. मेरे ख़्याल से प्यार करने की इससे अच्छी जगह हो ही नहीं सकती.” यह कहते हुए उसने मेरे होंठो को चूमना चाहा तो मैं उससे दूर हटने लगी. उसने मुझे बाहों में कास लीया और मेरे होंठो को ज़ोर से अपने होंठो में दबाकर चूसना शुरू कर दीया. मैं जबरन उसके होंठो की गिरफ्त से आज़ाद हो कर बोली, “छोडो, मुझे सांस लेने में तकलीफ हो रही है.” उसने मुझे छोड़ तो दीया मगर मेरी चूची पर अपना एक हाथ रख दीया. मैं समझ रही थी की आज इसका मन पूरी तरह रोमांटिक हो चुक्का है. मैंने कहा, “मैं तो उस दीन को रो रही हूँ जब मैंने तुम्हारे गाल पर कीस करके अपने लिए मुसीबत पैदा कर ली. ना मैं तुम्हे कीस करती और ना तुम इतना खुलते.” “तुमसे प्यार तो मैं काफी समय से कर्ता था. मगर उस दीन के बाद से मैं यह पूरी तरह जान गया की तुम भी मुझसे प्यार करती हो. वैसे एक बात कहों, तुम हो ही इतनी हसीं की तुम्हे प्यार किय बीना मेरा मन नहीं मान-ता है.”



वो मेरी चूची को दबाने लगा तो मैं बोली, “उम्म्म्म्म क्यों दबा रहे हो इसे? छोडो ना, मुझे कुछ कुछ होता है.” “क्या होता है?” वो और भी ज़ोर से दबाते हुए बोला, मैं क्या बोलती, ये तो मेरे मन की एक फीलींग थी जिसे शब्दो में कह पाना मेरे लिए मुश्कील था. इसे मैं केवल अनुभव कर रही थी. वो मेरी चूची को बदस्तूर मसलते दबाते हुए बोला, “बोलो ना क्या होता है?”



“उम्म्म्म्म उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ मेरी समझ में नहीं आ रह है की मैं इस फीलींग को कैसे व्यक्त करूं. बस समझ लो की कुछ हो रह है.”



वो मेरी चूची को पहले की तरह दबाता और मसलता रहा. फीर मेरे होंठो को कीस करने लगा. मैं उसके होंठो के चुम्बन से कीच कुछ गरमा होने लगी. जो मौका हमे संयोग से मीला था उसका फायदा उठाने के लिए मैं भी व्याकुल हो गयी. तभी उसने मेरे कपडो को उतारने का उपक्रम कीया. होंठ को मुकत कर दीया था. मैं उसकी ओर देखते हुए मुस्कुराने लगी. ऐसा मैंने उसका हौंसला बढाने के लिए कीया था. ताकी उसे एहसास हो जाये की उसे मेरा support मील रहा है.



मेरी मुस्कराहट को देखकर उसके चहरे पर भी मुस्कराहट दिखाई देने लगी. वो आराम से मेरे कपडे उतारने लगा, पहले उसका हाथ मेरी चूची पर ही था सो वो मेरी चूची को ही नंगा करने लगा. मैं हौले से बोली, “मेरा विचार है की तुम्हे अपनी भावनाओं पर काबू करना चाहिऐ. प्यार की ऐसी दीवानगी अच्छी नहीं होती.”



उसने मेरे कुछ कपडे उतार दीये. फीर मेरी ब्रा खोलते हुए बोला, “तुम्हारी मस्त जवानी को देखकर अगर मैं अपने आप पर काबू पा लूं तो मेरे लीये ये एक अजूबे के समन होगा.”



मैंने मन में सोचा की अभी तुमने मेरी जवानी को देखा ही कहॉ है. जब देख लोगे तो पता नहीं क्या हाल होगा. मगर मैं केवल मुस्कुरायी. वो मेरे मम्मे को नंगा कर चुक्का था. दोनो चूचियों में ऐसा तनाव आ गया था उस वक़्त तक की उसके दोनो निप्प्ले अकड़ कर और ठोस हो गए थे. और सुई की त्तारह तन गए थे. वो एक पल देख कर ही इतना उत्तेजित हो गया था की उसने निप्प्ले समेट पूरी चूची को हथेली में समेटा और कास कास कर दबाने लगा. अब मैं भी उत्तेजित होने लगी थी. उसकी हर्कतो से मेरे अरमान भी मचलने लगे थे. मैंने उसके होंठो को कीस करने के बाद प्यार से कहा, “छोड़ दो ना मुझे. तुम दबा रहे हो तो मुझे गुदगुदी हो रही है. पता नहीं मेरी चूचियों में क्या हो रहा है की दोनो चूचियों में तनाव सा भरता जा रहा है. Please छोड़ दो, मत दबाओ.” वो मुस्कुरा कर बोला, “मेरे बदन के एक खास हिस्से में भी तो तनाव भर गया है. कहो तो उसे निकाल कर दिखाऊँ?”



मैं समझ नहीं पाई की वो किसकी बात कर रहा है. मगर एक एक वो अपनी पैंट उतारने लगा तो मैं समझ गयी और मेरे चहरे पर शर्म की लालओ फैल गयी. वो किसमें तनाव आने की बात कर रहा था उसे अब मैं पूरी तरह समझ गयी थी. मुझे शर्म का एहसास भी हो रहा था और एक प्रकार का रोमांच भी सारे बदन में अनुभव हो रहा था. मैं उसे मना करती रह गयी मगर उसने अपना काम करने से खुद को नहीं रोका, और अपनी पैंट उतार कर ही माना. जैसे ही उसने अपना अंडरवियर भी उतारा तो मैंने जल्दी से निगाह फेर ली.



वो मेरा हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचते हुए बोला, “छू कर देखो ना. कीतना तनाव आ गया है इसमें. तुम्हारे न्प्प्ले से ज्यादा तन गया है ये.”



मैंने अपना हाथ छुडाने की acting भर की. सच तो ये था की मैं उसे छूने को उतावली हो रही थी. अब तक देखा भी नहीं था. छू कर देखने की बात तो और थी. उसने मेरे हाथ को बढ़ा कर एक मोटी सी चीज़ पर रख दीया. वो उसका लंड है ये मैं समझ चुकी थी. एक पल को तो मैं सन् रह गयी, उसका लुंड पकड़ने के बाद. मेरे दील की धड़कन इतनी तेज़ हो गयी की खुद मेरे कानो में भी गूंजती लग रही थी. मैं उसके लंड की ज़द की ओर हाथ बढाने लगी तो एह्साह हुआ की लंड लम्बा भी काफी था. मोटा भी इस क़दर की उसे एक हाथ में ले पाना एक प्रकार से नामुमकीन ही था.



वो मुझे गरम होता देख कर मेरे और करीब आ गया और मेरे निप्प्ले को सहलाने लगा. एक एक उसने निप्प्ले को चूमा तो मेरे बदन में ख़ून का दौरा तेज़ हो गया, और मैं उसके लंड के ऊपर तेज़ी से हाथ फिराने लगी. मेरे ऐसा करते हु उसने झट से मेरे निप्प्ले को मुँह में ले लीया और चूसने लगा. अब तो मैं पूरी मस्ती में आ गयी और उसके लंड पर बार बार हाथ फेर कर उसे सहलाने लगी. बहुत अच्चा लग रहा था, मोटे और लंबे गरम लंड पर हाथ फिराने में.



एक एक वो मेरे निप्प्ले को मुँह से निकाल कर बोला, “कैसा लग रहा है मेरे लंड पर हाथ फेरने में?”



मैं उसके सवाल को सुनकर शर्म गई. हाथ हटाना चाहा तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर लंड पर ही दबा दीया और बोला, “तुम हाथ फेरती हो तो बहुत अच्चा लगता है, देखो ना, तुम्हारे द्वारा हाथ फेरने से और कीतना तन गया है.”



मुझसे रहा नहीं गया तो मैं मुस्कुरा कर बोली, “मुझे दिखाई कहां दे रहा है?”



“देखोगी ! ये लो.” कहते हुए वो मेरे बदन से दूर हो गया और अपनी क़मर को उठा कर मेरे चहरे के समीप कीया तो उसका मोटा तगादा लंड मेरी निगाहो के आगे आ गया. लंड का सुपादा ठीक मेरी आंखो के सामने था और उसका आकर्षक रुप मेरे मन को विचलित कर रहा था. उसने थोडा सा और आगे बढ़ाया तो मेरे होंठो के एकदम करीब आ गया. एक बार

तो मेरे मन में आया की मैं उसके लंड को कीस कर लूं मगर झीझक के कारण मैं उसे चूमने को पहल नहीं कर पा रही थी. वो मुस्कुरा कर बोला, “मैं तुम्हारी आंखो में देख रहा हूँ की तुम्हारे मन में जो है उसे तुम दबाने की कोशिश कर रही हो. अपनी भावनाओं को मत दबाओ, जो मन में आ रहा है, उसे पूरा कर लो.”



उसके यह कहने के बाद मैंने उसके लंड को चूमने का मन बनाया मगर एकदम से होंठ आगे ना बढ़ा कर उसे चूमने की पहल ना कर पाई. तभी उसने लंड को थोडा और आगे मेरे होंठो से ही सटा दीया, उसके लंड के देहाकते हुए सुपादे का स्पर्श होंठो का अनुभव करने के बाद मैं अपने आप को रोक नहीं पाई और लंड के सुपादे को जल्दी से चूम लीया. एक बार चूम लेने के बाद तो मेरे मन की झीझक काफी कम हो गयी और मैं बार बार उसके लंड को दोनो हाथो से पकड़ कर सुपादे को चूमने लगी, एकाएक उसने सिस्कारी लेकर लंड को थोडा सा और आगे बढ़ाया तो मैंने उसे मुँह में लेने के लीये मुँह खोल दीया, और सुप्पदा मुँह में लेकर चूसने लगी.



इतना मोटा सुपादा और लंड था की मुँह में लीये रखने में मुझे परेशानी का अनुभव हो रहा था, मगर फीर भी उसे चूसने की तमन्ना ने मुझे हार मान-ने नहीं दीया और मैं कुछ देर तक उसे मज़े से चुस्ती रही. एक एक उसने कहा, “हाईई तुम इसे मुँह में लेकर चूस रही हो तो मुझे कीतना मज़ा आ रहा है, मैं तो जानता था की तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो, मगर थोडा झिझकती हो. अब तो तुम्हारी झीझक समाप्त हो गयी, क्यों है ना?”
 
मैं हाँ में सीर हीला कर उसकी बात का समर्थन कीया और बदस्तूर लंड को चुस्ती रही. अब मैं पूरी तरह खुल गयी थी और चुदाई का अनंद लेने का इरादा कर चुकी थी. वो मेरे मुँह में धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. मैंने अंदाजा लगा लीया की ऐसे ही धक्के वो चुदाई के समय भी लगाएगा.चुदाई के बारे में सोचने पर मेरा ध्यान अपनी चूत की ओर गया, जीसे अभी उसने निवास्त्र नहीं कीया था. जबकी मुझे चूत में भी हलकी हलकी सिहरन महसूस होने लगी थी. मैं कुछ ही देर में थकान का अनुभव करने लगी. लंड को मुँह में लेने में परेशानी का अनुभव होने लगा. मैंने उसे मुँह से निकालने का मन बनाया मगर उसका रोमांच मुझे मुँह से निकालने नहीं दे रहा था. मुँह थक गया तो मैंने उसे अंदर से तो नीकाल लीया मगर पूरी तरह से मुकत नहीं कीया. उसके सुपादे को होंठो के बीच दबाये उस पर जीभ फेरती रही. झीझक ख़त्म हो जाने के कारण मुझे ज़रा भी शर्म नहीं लग रही थी.




तभी वो बोला, “है मेरी जान, अब तो मुकत कर दो, Please नीकाल दो ना.”



वो मिन्नत करने लगा तो मुझे और भी मज़ा आने लगा और मैं प्रयास करके उसे और चूसने का प्रयत्न करने लगी. मगर थकान की अधिकता हो जाने के कारण, मैंने उसे मुँह से नीकाल दीया. उसने एक एक मुझे धक्का दे कर गीरा दीया और मेरी jeans खोलने लगा और बोला,“मुझे भी तो अपनी उस हसीं जवानी के दर्शन कर दो, जीसे देखने के लीये मैं बेताब हूँ.”



मैं समझ गयी की वो मेरी चूत को देखने के लीये बेताब था. और इस एहसास ने की अब वो मेरी चूत को नंगा करके देख लेगा साथ ही शरारत भी करेगा. मैं रोमांच से भर गयी. मगर फीर भी दिखावे के लीये मैं मना करने लगी. वो मेरी jeans को उतार चुकने के बाद मेरी पैंटी को खींचने लगा तो मैं बोली, “छोडो ना ! मुझे शर्म आ रही है.”



“लंड मुँह में लेने में शर्म नहीं आयी और अब मेरा मन बेताब हो गया है तो सिर्फ दिखाने में श रम आ रही है.” वो बोला. उसने खींच कर पैंटी को उतार दीया और मेरी चूत को नंगा कर दीया. मेरे बदन में बिजली सी भर गयी. यह एहसास ही मेरे लीये अनोखा था ई उसने मेरी चूत को नंगा कर दीया था. अब वो चूत के साथ शरारत भी करेगा.वो चूत को छूने की कोशिश करने लगा तो मैं उसे जान्घो के बीच छिपाने लगी. वो बोला, “क्यों छुपा रही हो. हाथ ही तो लगाऊंगा. अभी चूमने का मेरा इरादा नहीं है. हाँ अगर प्यारी लगी तो जरूर चूमुंगा.”



उसकी बात सुनकर मैं मन ही मन रोमांच से भर गयी. मगर मैं बोली, “तुम देख लोगे उसे, मुझे दिखाने में शर्म आ रही है. आंख बंद करके छुओगे तो बोलो.”



“ठीक है ! जैसी तुम्हारी मरजी. मैं आंख बंद कर्ता हूँ, तुम मेरा हाथ

पकड़ कर अपनी चूत पर रख देना.”



मैंने हाँ में सीर हीलाया. उसने अपनी आंख बंद कर ली तो मैं उसका हाथ

पकड़ कर बोली, “चोरी छीपे देख मत लेना, ओक, मैं तुम्हारा हाथ अपनी चूत पर रख रही हूँ.”



मैंने चूत पर उसका हाथ रख दीया. फीर अपना हाथ हटा लीया. उसके हाथ का स्पर्श चूत पर लगते ही मेरे बदन में सनसनाहट होने लगी. गुदगुदी की वजह से चूत में तनाव बढने लगा. उस पर से जब उसने चूत को छेड़ना शुरू कीया तो मेरी हालत और भी खराब हो गयी. वो पूरी चूत पर हाथ फेरने लगा. फीर जैसे ही चूत के अंदर अपनी ऊँगली घुसाने की चेष्टा की तो मेरे मुँह से सिस्कारी निकल गयी. वो चूत में ऊँगली घुसाने के बाद चूत की गहराई नापने लगा. मुझे इतना मज़ा आने लगा की मैंने चाहते हुए भी उसे नहीं रोका. उसने चूत की काफी गहराई में घुसा दी थी.



मैं लगातार सिस्कारी ले रही थी. मेरी कुंवारी और नाज़ुक चूत का कोना कोना जलने लगा. तभी उसने एक हाथ मेरी गांड के नीचे लगाया क़मर को थोडा ऊपर करके चूत को चूमना चाहा. उसने अपनी आंख खोल ली थी और होंठों को भी इस प्रकार खोल लीया था जैसे चूत को होंठो के बीच मैं दबाने का मन हो. मेरी हलकी झांतो वाली चूत को होंठों के बीच दबा कर जब उसने चोसना शुरू कीया तो मैं और भी बुरी तरह छातपाताने लगी. उसने कास कास कर मेरी चूत को चूसा और चंद ही पालो मैं चूत को इतना गरम कर डाला की मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और होंठो से कामुक सिस्कारी निकलने लगी. इसके साथ ही मैं क़मर को हीला हीला कर अपनी चूत उसके होंठों पर रगड़ने लगी.



उसने समझ लीया की उसके द्वारा चूत चूसे जाने से मैं गरम हो रही हूँ. सो उसने और भी तेज़ी से चूसना शुरू कीया साथ ही चूत के सुराख के अंदर जीभ घुसा कर गुदगुदाने लगा. अब तो मेरी हालत और भी खराब होने लगी. मैं ज़ोर से सिस्कारी ले कर बोली, “वीनय येस् क्या कर रहे हो. इतने ज़ोर से मेरी चूत को मत चूसो और ये तुम छेद के अंदर गुदगुदी……. ऊऊईईई….. मुझसे बर्दस्थ नहीं हो पा रहा है. Please निकालो जीभ अंदर से, मैं पागल हो जाउंगी.”



मैं उसे निकलने को जरूर कह रही थी मगर एक सच यह भी था की मुझे

बहुत मज़ा आ रहा था. चूत की गुद्गुदाहत से मेरा सारा बदन काँप रहा था. उसने तो चूत को छेद छेद कर इतना गरम कर डाला की मैं बर्दस्थ नहीं कर पाई. मेरी चूत का भीतरी हिस्सा रस से गीला हो गया. उसने कुछ देर तक चूत के अंदर तक के हिस्से को गुदगुदाने के बाद चूत को मुकत कर दीया. मैं अब एक पल भी रुकने की हालत मैं नहीं थी. जल्दी से उसके बदन से बदन से लिपट गयी और लंड को पकड़ने का प्रयास कर रही थी की उसे चूत मैं दाल लूंगी की उसने मेरी टांगो के पकड़ कर एकदम ऊंचा उठा दीया और नीचे से अपना मोटा लंड मेरी चूत के खुले हुए छेद मैं घुसाने की कोशिश की. वैसे तो चूत का दरवाज़ा आम तौर पर बंद होता था. मगर उस वक़्त क्योंकी उसने टांगो को ऊपर की ओर उठा दीया था इसलिए छेद पूरी तरह खुल गया था. रस से चूत गीली हो रही थी. जब उसने लंड का सुपादा छेद पर रख्खा तो ये भी एहसास हुआ की छेद से और भी रस निकलने लगा. मैं एक पल को तो सिसिया उठी. जब उसने चूत मैं लंड घुसाने की बजाये हल्का सा रागादा. मैं सिस्कारी लेकर बोली, “घुसाओ जल्दी से………. देर मत करो Please……………..”



उसने लंड को चूत के छेद पर अड़ा दीया. पहली बार मुझे ये एहसास हुआ की मेरी चूत का सुराख उम्मीद से ज्यादा ही छोटा है. क्योंकी लंड का सुपादा अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था. मेरी हालत तो ऐसी हो चुकी थी की अगर उसने लंड जल्दी अंदर नहीं कीया तो शायद मैं पागल हो जाऊं. वो अंदर डालने की कोशिश कर रहा था.मैं बोली,“क्या कर रहे हो जल्दी घुसाओ ना अंदर. ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् ऊऊम्म्म्म्म्म् अब तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. Please जल्दी से अंदर कर दो.”



वो बार बार लंड को पकड़ कर चूत मैं डालने की कोशिश कर्ता और बार बार लंड दूसरी तरफ फिसल जात. वो भी परेशान हो रहा था और मैं भी. मैं सिसियाने लगी, क्योंकी चूत के भीतरी हिस्से मैं ज़ोरदार गुदगुदी सी हो रही थी. मैं बार बार उसे अंदर करने के लीये कहे जा रही थी. वो प्रयास कर तो रहा था मगर लंड की मोटाई के कारण चूत के अंदर नहीं जा पा रहा था. तभी उसने कहा, “उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ तुम्हारी चूत का सुराख तो इस क़दर छोटा है की लंड अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा है मैं क्या करूं?”



“तुम तेज़ झटके से घुसाओ अगर फीर भी अंदर नहीं जाता है तो फाड़ दो मेरी चूत को.” मैं जोश मैं आ कर बोल बैठी. मेरी बात सुनकर वो भी बहुत जोश मैं आ गया और उसने ज़ोर का धक्का मारा. एकदम जानलेवा धक्का था, भक्क से चूत के अंदर लंड का सुपादा समां गया, इसके साथ ही मेरे मुँह से चीख भी निकल गयी. चूत की ओर देखा तो पाय की बीच से फट गयी थी और ख़ून निकल रहा था. ख़ून देखने के बाद तो मेरी घबराहट और बढने लगी मगर कीसी तरह मैंने अपने आप पर काबू कीया.



उसके लंड ने चूत का थोडा सा ही सफ़र पूरा कीया था और उसी मैं मेरी हालत खराब होने लगी थी. चूत के एकदम बीचों बीच धंसा हुआ उसका लंड खतरनाक लग रहा था. मैं दर्द से कराह-हटे हुए बोली, “My god ! मेरी चूत तो सचमुच फट गयी उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ दर्द सेहन नहीं हो रहा है. अगर पूरा लंड अंदर घुसाओगे तो लगता है मेरी जान ही नीकल जायेगी.”



“नहीं यार! मैं तुम्हे मरने थोड़े ही दूंगा.” वो बोला और लंड को हिलाने लगा तो मुझे ऐसा अनुभव हुआ जैसे चूत के अंदर बवंडर मचा हुआ हो. जब मैंने कहा की थोड़ी देर रूक जाओ, उसके बाद धक्के मारना तो उसने लंड को जहाँ का तहां रोक दीया और हाथ बढ़ा कर मेरी चूची को पकड़ कर दबाने लगा. चूची मैं कठोरता पूरे शबाब पर आ गयी थी और जब उसने दबाना शुरूकिया तो मैंने चूत की ओर से कुछ रहत महसूस की. कारण मुझे चूचियों का दब्वाया जान अच्चा लग रहा था. मेरा तो यह तक दील कर रहा था की वो मेरे निप्प्ले को मुँह मैं लेकर चूसता. इससे मुझे अनंद भी आता और चूत की ओर से ध्यान भी बाँट-ता. मगर टांग उसके कंधे पर होने से उसका चेहरा मेरे निप्प्ले तक पहुंच पाना एक प्रकार से नामुमकीन ही था.



तभी वो लंड को भी हिलाने लगा. पहले धीरे धीरे उसके बाद तेज़ गति से.

चूची को भी एक हाथ से मसल रहा था. चूत मैं लंड की हलकी हलकी

सरसराहट अच्छी लगने लगी तो मुझे अनंद आने लगा. पहले धीरे और उसके

उसने धक्को की गति तेज़ कर दी. मगर लंड को ज्यादा अंदर करने का प्रयास उसने अभी नहीं कीया था. एक एक वीनय बोला, “तुम्हारी चूत इतनी कम्सिन और tight है की क्या कहूं?”



उसकी बात सुनकर मैं मुस्करा कर रह गयी. मैंने कहा, “मगर फीर भी तो तुमने फाड़ कर लंड घुसा ही दीया.”



“अगर नहीं घुसाता तो मेरे ख़्याल से तुम्हारे साथ मैं भी पागल हो जाता.”



मैं मुस्करा कर रह गयी.वो तेज़ी से लंड को अंदर बहार करने लगा था. अब चूत मैं दर्द अधीक तो नहीं हो रहा था हाँ हल्का हल्का सा दर्द उठ रहा था. मगर उससे मुझे कोई परेशानी नहीं थी. उसके मुकाबले मुझे मज़ा आ रहा था. कुछ देर मैं ही उसने लंड को ठेल कर काफी अंदर कर दीया था. उसके बाद भी जब और ठेल कर अंदर घुसाने लगा तो मैं बोली, “और अंदर कहां करोगे, अब तो सारा का सारा अंदर कर चुके हो. अब बाक़ी क्या रह गया है?”



“एक इंच बाक़ी रह गया है.” कहते ही उसने मुझे कुछ बोलने का मौका दीये

बग़ैर ज़ोर से झटका मार कर लंड को चूत की गहरायी मैं पहुँचा दीया.

मैं चीख कर रह गयी. उसके लंड के ज़ोरदार प्रहार से मैं मस्त हो कर रह गयी थी. ऐसा अनंद आया की लगा उसके लंड को चूत की पूरी गहरायी मैं दाखील करवा ही लूं. उसी मैं मज़ा आएगा. यह सोच कर मैंने कहा, “हाऐईईइ…… और अंदर…….. घुसाआअऊऊऊ. गहरायी मैं पहुँचा दो.”



उसने मेरी जांघों पर हाथ फेरा और लंड को ज़ोर से ठेला तो मेरी चूत से अजीब तरह की आवाज़ नीक्ली और इसके साथ ही मेरी चूत से और भी ख़ून गिरने लगा. मगर मुझे इससे भी कोई परेशानी नहीं हुई थी, बल्की यह देख कर मैं अनंद मैं आ गयी की चूत का सुराख पूरा खुल गया था और लंड सारा का सारा अंदर था. एक पल को तो मैं यह सोच कर ही रोमंचित हो गयी की उसके बम्बू जैसे लंड को मैंने अपनी चूत मैं पूरा डलवा लीया था. उस पर से जब उसने धक्के मारने लगा, तो एहसास हुआ की वाकई जो मज़ा चुदाई मैं है वो कीसी और तरीके से मौज-मस्ती करने से नहीं है.



उसका ८ इंच लंड अब मेरी चूत की गहराई को पहले से काफी अच्छी तरह नाप

रहा था. मैं पूरी तरह मस्त होकर मुँह से सिस्कारी निकालने लगी. पता

नहीं कैसे मेरे मुँह से एकदम गन्दी गन्दी बात निकलने लगी थी. जिसके बारे मैं मैंने पहले कभी सोचा तक नहीं था. फ्ह्ह्हाद्द्द्द्द….. दूऊऊओ मेरीईईइ चूऊओत्त्त्त्त्त्त् कूऊऊऊ आआह्ह्ह्ह्ह्ह् प्प्प्पीईईईल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लूऊऊऊओ और्र्र्र्र्र तेज़ पेलो टुकड़े टुकड़े कर दो मेरी चूऊऊत्त्त्त्त्त्त्त् कीईईईईईईई.



एक एक मैं झड़ने के करीब पहुंच गयी तो मैंने वीनय को और तेज़ गति से ढके मरने को कह दीया,अब लंड मेरी छुट को पार कर मेरी बच्चेदानी से टकराने लगा था, तभी चूत मैं ऐसा संकुचन हुआ की मैंने खुद बखुद उसके लंड को ज़ोर से चूत के बीच मैं कास लीया. पूरी चूत मैं ऐसी गुद्गुदाहत होने लगी की मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरे मुँह से ज़ोरदार सिस्कारी निकलने लगी. उसने लंड को रोका नहीं और धक्के मारता रहा. मेरी हालत जब कुछ अधीक खराब होने लगी तो मेरी रुलायी चुत नीक्ली.
 
कुछ देर तक वो मेरी चूत मैं ही लंड डाले मेरे ऊपर पड़ा रहा. मैं आराम से कुछ देर तक सांस लेटी रही. फीर जब मैंने उसकी ओर ध्यान दीया तो पाय की उसका मोटा लंड चूत की गहराई मैं वैसे का वैसा ही खड़ा और अकादा हुआ पड़ा था. मुझे नॉर्मल देखकर उसने कहा, “कहो तो अब मैं फीर से धक्के मारने शुरू करूं.”




“मारो, मैं देखती हूँ की मैं बर्दाश्त कर पाती हूँ या नहीं.”



उसने दुबारा जब धक्के मारने स्टार्ट कीए तो मुझे अग जैसे मेरी चूत मैं कांटे उग आये हो, मैं उसके धक्के झेल नहीं पाई और उसे मना कर दीया. मेरे बहुत कहने पर उसने लंड बहार निकलना स्वीकार कर लीया. जब उसने बहार निकाला तो मैंने रहत की सांस ली. उसने मेरी टांगो को अपने

कंधे से उतार दीया और मुझे दूसरी तरफ घुमाने लगा तो पहले तो मैं

समझ नहीं पाई की वो करना क्या चाहता है. मगर जब उसने मेरी गांड को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसमें लंड घुसाने के लीये मुझे आगे की ओर झुकाने लगा तो मैं उसका मतलब समझ कर रोमांच से भर गयी.



मैंने खुद ही अपनी गांड को ऊपर कर लीया और कोशिश करी की गांड का छेद

खुल जाये. उसने लंड को मेरी गांड के छेद पर रख्खा और अंदर करने के लीये हल्का सा दबाव ही दीया था की मैं सिसकी लेकर बोली, “थूक लगा कर घुसाओ.”

उसने मेरी गांड पर थूक चुपड़ दीया और लंड को गांड पर रखकर अंदर डालने लगा. मैं बड़ी मुश्कील से उसे झेल रही थी. दर्द महसूस हो रहा था. कुछ देर मैं ही उसने थोडा सा लंड अंदर करने मैं सफलता प्राप्त कर ली थी. फीर धीरे धीरे धक्के मारने लगा, तो लंड मेरी गांड के अंदर रगड़ खाने लगा

तभी उसने अपेख्शाकरत तेज़ गाती से लंड को अंदर कर दीया, मैं इस हमले के

लीये तैयार नहीं थी, इसलिए आगे की ओर गिरते बची. सात की पुष्ट को सख्ती

से पकड़ लीया था मैंने. अगर नहीं पकद्ती तो जरूर ही गिर जाती. मगर इस

झटके का एक फायदा यह हुआ की लंड आधा के करीब मेरी गांड मैं धंस गया था. मेरे मुँह से दर्द भरी सिस्कारियां निकलने लगी ….. फट गयी मेरी गाआआअन्न्न्न्न्द्द्द्द्द्…… हाआआऐईईईईईइ ऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…….. उसने अपना लंड जहाँ का तहां रोक कर धीरे धीरे धक्के लगाने स्टार्ट कीए. मुझे अभी अनंद ही आना शुरू हुआ था की तभी वो तेज़ तेज़ झटके मारता हुआ काँपने लगा, लंड का सुपादा मेरी गांड मैं फूल पिचक रहा था, आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् मेर्र्र्र्रीईईईईई जाआअन्न्न्न्न्न्न्न्न् म्म्म्म्म्म्म्म्म आआआआआअ कहता हुआ वो मेरी गांड मैं ही झाड़ गया. मैंने महसूस कीया की मेरी गांड मैं उसका गाढ़ा और गरम वीर्य टपक रहा था.

उसने मेरी पीठ को कुछ देर तक चूमा और अपने लंड को झटके देता रहा. उसके बाद पूरी तरह शांत हो गया. मैं पूरी तरह गांड मरवाने का अनंद भी नहीं ले पाई थी. एक प्रकार से मुझे अनंद आना शुरू ही हुआ था. उसने लंड नीकाल लीया. मैं कपडे पहनते हुए बोली, “तुम बहुत बदमाश हो. शादी से पहले ही सब कुछ कर डाला.”



“वो मुस्कुराने लगा. बोला, “क्या कर्ता, तुम्हारी कम्सिन जवानी को देख कर दील पर काबू रखना मुश्कील हो रहा था. कयी दीनो से चोदने का मन था, आज अच्च्चा मौका था तो छोड़ने का मन नहीं हुआ. वैसे तुम इमानदारी से बताओ की तुम्हे मज़ा आया या नहीं?”



उसकी बात सुनकर मैं चुप हो गयी और चुपचाप अपने कपडे पहनती रही. मैं मुस्करा भी रही थी. वो मेरे बदन से लिपट कर बोला, “बोलो ना ! मज़ा आया?”



“हाँ” मैंने हौले से कह दीया.



“तो फीर एक काम करो, मेरा मन नहीं भरा है. तुम कार अपने ड्राइवर को दे दो और उसे कह दो की तुम अपनी एक सहेली के घर जा रही हो. रात भर उसके घर मैं ही रहोगी. फीर हम दोनो रात भर मौज मस्ती करेंगे.”



मैं उसकी बात सुनकर मुस्करा कर रह गयी. बोली, “दोनो तरफ का बाजा बजा

चुके हो फीर भी मन नहीं भरा तुम्हारा?”



“नहीं ! बल्की अब तो और ज्यादा मन बेचैन हो गया है. पहले तो मैंने इसका

स्वाद नहीं लीया था, इसीलिये मालूम नहीं था की चूत और गांड चोदने मैं कैसा मज़ा आता है. एक बार चोदने के बाद और चोदने का मन कर रहा है. और मुझे यकीन है की तुम्हारा भी मन कर रहा होगा.”



“नहीं मेरा मन नहीं कर रहा है”



“तुम झूठ बोल रही हो. दील पर हाथ रख कर कहो”



मैंने दील की झूठी क़सम नहीं खाई. सच कह दीया की वाकई मेरा मन नहीं भरा है. मेरी बात सुना-ने के बाद वो और भी जिद्द करने लगा. कहने लगा की Please मान जाओ ना ! बड़ा मज़ा आएगा. सारी रात रंगीन हो जायेगी.”



मैं सोचने लगी. वैसे तो मैं रात को अपनी सहेलियों के पास कयी बार रूक चुकी थी मगर उसके लीये मैं मम्मी को पहले से ही बता देती थी. इस प्रकार आइं मौक़े पर मैंने कभी रात भर बहार रहने का प्रोग्रॅम नहीं बनाया था. सोचते सोचते ही मैंने एक एक प्रोग्रॅम बाना लीया. मगर बोली, “सवाल यह है की हम लोग रात भर रहेंगे कहां? होटल मैं?”



“होटल मैं रहना मुश्कील है. खतरा भी है. क्योंकी तुम अभी कम्सिन हो. मेरे दोस्त अजय का एक बंग्लोव खाली है. मैं उसे फ़ोन कर दूंगा तो वो हमारे पहुँचने से पहले सफाई वगेरह करवा देगा.”



उसकी बात मुझे पसंद तो आ रही थी मगर दील गवारा नहीं कर रहा था. एका एक उसने मेरे हाथ मैं अपना लंड पकडा दीया और बोला, “घर के बारे मैं नहीं, इसके बारे मैं सोचो. यह तुम्हारी चूत और गांड का दीवाना है. और तुम्हारी चूत मारने को उतावला हो रहा है.”



उसके लंड को पकड़ने के बाद मेरा मन फीर उसके लंड की ओर मुड़ने लगा. उसे मैं सहलाने लगी. फीर मैंने हाँ कह दीया. उसके लंड को जैसे ही मैंने हाथ मैं लीया था, उसमें उत्तेजना आने लगी. वो बोला, “देखो फीर खड़ा हो रहा है. अगर मन कर रहा है तो बताओ चलते चलत एक बार और चुदाई का मज़ा ले लीया जाये.”



यह कहते हुए उसने लंड को आगे बढ़ा कर चूत से सटा दीया. उस वक़्त मैंने jeans और पैंटी नहीं पहनी थी. वो चूत पर लंड को रगड़ने लगा. उसके रगड़ने से मेरी चूत पानी छोड़ने लगी, मेर मन मैं चुदाई का विचार आने लगा था. मगर मैंने अपनी भावनाओं पर काबू पाने का प्रयास कीया. उसने मेरी चूत मैं लंड घुसाने के लीये हल्का सा धक्का मारा. मगर लंड एक ओर फिसल गया. मैंने जल्दी से लंड को दोनो हाथो से पकड़ लीया, और बोली, “चूत मैं मत डालो. जब रात रंगीन करने का मन बाना ही लीया है तो फीर इतना बेताब क्यों हो रहे हो. या तो इसे ठण्डा कर लो या फीर मैं कीसी और तरीके से इसे ठण्डा कर देती हूँ.”



“तुम कीसी और तरीके से ठण्डा कर दो. क्योंकी ये खुद तो ठण्डा होने वाला

नहीं है.”



मैं उसके लंड को पकड़ कर दो पल सोचती रही फीर उस पर तेज़ी से हाथ फिराने लगी. वो बोला, “क्या कर रही हो?”



“मैंने एक सहेली से सुना है की लड़के लोग इस तरह झटका देकर मुट्ठ मारते

हैं और झाड़ जाते हैं.”



वो मेरी बात सुनकर मुस्करा कर बोला, “ऐसे चुदाई का मज़ा तो लीया जाता है मगर तब, जब कोई प्रेमीका ना हो. जब तुम मेरे पास हो तो मुझे मुट्ठ मारने की क्या जरूरत है?”



“समझो की मैं नहीं हूँ?”



“ये कैसे समझ लूं. तुम तो मेरी बाहों मैं हो.” कह कर वो मुझे बाहो मैं लेने लगा. मैंने मना कीया तो उसने छोड़ दीया. वो बोला, “कुछ भी करो. अगर चूत मैं नहीं तो गांड मैं…….” कह कर वो मुस्कुराने लगा. मैं शर्म कर बोली, “धात”.



“तो फीर मुँह से चूस कर मुझे झाड़ दो.”



मैं नहीं नहीं करने लगी. आखीर मैं गांड मरना मैंने पसंद कीया. फीर मैं घोड़ी बनकर गांड उसकी तरफ कर घूम गयी. उसने मेरी गांड पर थोडा सा थूक लगाया और अपने लंड पर भी थोडा सा थूक चुप्दा और लंड को गांड के छेद पर टिका कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और अपना आधा लंड मेरी गांड मैं घुसा दीया. मेरे मुँह से कराह नीकल गयी आआआआआईईईईईईई मुम्म्म्म्म्म्य्य्य्य्य्य्य्य माआर्र्र्र दियाआआआअ फ़ाआअद्द्द्द्द्द्द् बहुत दर्द कर रहा है.



उसने दो तीन झटको मैं ही अपना लंड मेरी गांड के आकिरी कोने तक पहुँचा दीया, ऐसा लगा जैसे उसका लंड मेरी आन्तादियों को चीर डाल रहा हो. मैंने गांड मैं लंड दल्वाना इसलिए पसंद कीया था, की पिछली बार मैं गांड मरवाने का पूरा अनंद नहीं ले पाई थी और मेरा मन मचलता ही रह गया था, वो झाड़ जो गया था. ऍम मैं इसका भी मज़ा लूंगी ये सोच कर मैं उसका support करने लगी. गांड को पीछे की ओर धकेलने लगी. वो काफी देर तक तेज़ तेज़ धक्के मारता हुआ मुझे आनंदित कर्ता रहा, मैं खुद ही अपनी २ उँगलियाँ चूत मैं दाल कर अंदर बहार करने लगी, एक तो गांड मैं लंड का अंदर बहार होना और दूसरा मेरा उँगलियों से अपनी चूत को कुचलना दो तरफा अनंद से मैं जल्द ही झड़ने लगी और झाड़ते हुए बद्बदाने लगी, ह्ह्ह्हाआऐईईईईई तेरी गाआअन्न्न्न्न्न्न्द्द्द्द्द्द्द्द् आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् लंड कैसे कास कास कर जा रहा है म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म कहता हुआ वो मेरी पीठ पर ही गीर पड़ा और हांफने लगा.





थोड़ी देर ऐसे ही पडे रहने के बाद, हम दोनो ने अपने अपने कपडे पहने और वहाँ से वापस आ गई. ड्राइवर का घर पास मैं ही था. उसके पास जाकर मैंने उसे कार दे कर कहा की हम लोग आज कहीँ पार्टी मैं जा रहे हैं. मैंने उसे समझा दीया की वो घर मैं कह दे की मैं एक सहेली के घर चली गयी हू. आज रात उसके घर पर ही रहूंगी. फीर मैंने उसे ५०० का कै नोट पकडा दीया. रुपये पाकर वो खुश हो गया, बोला, “मैडम जी ! आप बेफिक्र हो जाईये. मैं सब संभल लूँगा. मालकिन को ऐसा सम्झौंगा की वो कुछ नहीं कहेंगी आपको.”



उसके बाद हम दोनो वहाँ से नीकल गई. एक जगह रूक कर वीनय ने टेलीफोन बूथ से अपने दोस्त को फ़ोन कर दीया. उसके बाद उसने मुझे बताया की उसका दोस्त मौजूद था और उसने कह दीया है की वो सारा इंतज़ाम कर देगा.



“सारे इंतज़ाम से तुम्हारा क्या मतलब?”



“मतलब खाने पीने से है.” वीनय ने मुस्करा कर कहा. हम दोनो एक आटो के ज़रीये उसके दोस्त के बंग्लोव मैं पहुंच गई. अच्चा खासा बंग्लोव था, काफी अच्छी तरह सजा हुआ.



वीनय के दोस्त ने हम दोनो का स्वागत कीया. वो भी आकर्षक लड़का था. वो वीनय से तो खुलकर बात करने लगा मगर मुझसे बात करने मैं झीझक रहा था. अन्दर जाने के बाद मैंने कहा की मैं अपने घर फ़ोन करना चाहती हूँ.



उसने सहमति जताई तो मैंने मम्मी को फ़ोन करके कह दीया की मैं आज रात नीमा के घर मैं हूँ और कल सुबह ही आऊंगी. मम्मी कुछ खास विरोध नहीं कर पाई. नीमा का नाम मैंने इसलिए लीया था की उसके घर का फ़ोन नुम्बेर मम्मी के पास नहीं था. वो उससे फ़ोन करके पूछ नहीं सकती थी की मैं उसके पास

हूँ या नहीं. फीर एक एक विचार आया की अगर मेरी मम्मी को मील गयी तो उसमें फ़ोन नुम्बेर है. इसलिए मैंने नीमा को भी इस बारे मैं बता देना ठीक समझा. नीमा को फ़ोन कीया तो वो पहले तो हंसने लगी फीर बोली, “लगता है वीनय के साथ मौज मस्ती करने मैं लगी हुई है. अकेले अकेले मज़े लेगी अपनी सहेली का कुछ ख़्याल नहीं है तुझे.”



वो बड़ी Sexy लडकी थी. मैंने भी हंस कर कहा, “अगर तेरा मन इतना बेताब हो रह है चुदवाने का तो फीर तू भी आजा, वैसे भी यहाँ दो लड़के हैं. एक तो विनय है और दूसरा उसका दोस्त. आजा तो तेरा भी काम बन जाएगा. मैं उसे तेरे लिए मना कर रखती हूँ.”
“वो मान जाएगा?”




“क्यों नहीं मानेगा यार. तेरी जैसे लडकी की चूत को देखकर कोई भी लड़का

चोदने के लिए मन नहीं करेगा. तू है ही ऐसी की, कोई मन करे ये नामुमकिन है.”



“ठीक है तो फिर मैं भी घर में कोई ना कोई बहन बाना कर आ रही

हूँ.”



उसने फ़ोन काट दीया. मैंने उसके बारे मैं वीनय को बताया, तो वो अपने दोस्त को बोला ले यार अजय तेरा भी इंतज़ाम हो गया है. इसकी एक सहेली है नीमा, वो आ रही है.”



अजय के चहरे पर निखार आ गया. बेड रुम मैं आ कर हम तीनो बातें करने लगे. कुछ देर मैं ही अजय से मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी. उसने बताया की वो भी पहले एक लडकी से प्यार कर्ता था मगर बाद मैं उसने धोखा दे दीया तो उसने कीसी और को प्रेमीका बनने के बारे मैं सोंचा ही नहीं.



थोड़ी देर तक बैठे बैठे मुझे बोरियत महसूस होने लगी. वीनय ने मेरी मानो स्तीथी भांप ली. वो अपने दोस्त से बोला, “यार अजय ! ज़रा उस तरफ देखना.” अजय दूसरी ओर देखने लगा तो वीनय ने मुझे बाहो मैं ले लीया और मेरी चूचियों को दबन लगा. होंठो को भी हौले हौले कीस करने लगा. तभी वहाँ नीमा आ गयी. वीनय मुझसे लिप्त हुआ था, उसे देखकर हम दोनो अलग हो गई. मैंने कहा, “हम तेरी ही राह देख रहे थे, वह भे बेचैनी से.”



उसके बाद मैंने उसका परिचय वीनय और अजय से करवाया. मैं देख रही थी की अजय गहरी निगाहों से नीमा की ओर देखे जा रहा था. साफ ज़ाहिर हो रहा था की नीमा उसे बहुत पसंद आ रही है.



एक एक मैं बोली, “यार, तुम दोनो ने एक दुसरे को पसंद कर लीया है तो ओहीर

तुम दोनो दूर दूर क्यों खडे हो. ऎन्जॉय करो यार.” यह कहते हुए मैं नीमा को अजय की ओर धकेल दीया. अजय ने जल्दी ही उसे बाहों मैं ले लीया. वी दोनो झिझ्कें नहीं यह सोच कर मैं भी वीनय से लिपट गयी और उसके होंठो को चूमने लगी. वीनय मेरी चूची दबाने लगा तो अजय ने भी नीमा के मम्मो पर हाथ रख दीया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा. मैं नीमा की ओर देखकर मुस्कुराई. नीम भी मुस्कुरा दी फीर अजय के बदन से लिपट कर उसे चूमने लगी. Un दोनो की शर्म खोलने और दोनो को ज्यादा उत्तेजित करने के इरादे से मैं वीनय के कपडे उतारने लगी. कुछ देर मैं मैंने उसके कपडे उतार दीये और लंड को पकड़ कर सहलाने लगी तो वो भी मेरी चूचियों को बेपर्दा करने लगा।

उधर नीमा मेरी देखा देखी, अजय के कपडे उतारने लगी. कुछ ही देर मैं उसने अजय के सारे कपडे उतार दीये. वो तो मुझसे भी एक कदम आगे नीक्ली और उसने झुक कर अजय का लंड दोनो हाथो मैं पकडा और सुपादे को चाटने लगी.



मैंने भी उसकी देखा देखी, वीनय के लंड को मुँह मैं ले लीया और उसे सुपादे को चूसने लगी. एक समय तो हम दोनो सहेलियां मस्ती से लंड मुँह मैं लीये हुए चूस रही थी. मुझे जितना मज़ा आ रहा था उससे कहीँ ज्यादा मज़ा नीम को अजय का लंड चूसने मैं आ रहा था, यह मैंने उसके चहरे को देखकर अंदाजा लगाया था. वो काफी खुश लग रही थी. बडे मज़े से लंड के ऊपर मुँह को आगे पीछे करते हुए वो चूस रही थी.



थोड़ी देर बाद उसने लंड को मुँह से नीकला और जल्दी जल्दी अपने निचले कपडे

उतारने लगी. मुझसे नज़र टकराते ही मुस्करा दी. मैं भी मुस्कुराई और मस्ती से वीनय के लंड को चूसने मैं लग गयी. कुछ देर बाद ही मैं भी नीम की तरह वीनय के बदन से अलग हो गयी और अपने कपडे उतारने लगी. कुछ देर बाद हम चारो के बदन पर कोई कपड़ा नहीं था.



अजय नीम की चूत को चूसने लगा तो मेरे मन मैं भी आया की वीनय भी मेरी चूत को उसी तरह चूसे. क्योंकी नीम बहुत मस्ती मैं लग रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे वो बीना लंड घुस्वाये ही चुदाई का मज़ा ले रही है. उसके मुँह से बहुत ही कामुक सिस्कारियां नीकल रही थी. वीनय भी मेरी टांगो के बीच मैं झुक कर मेरी चूत को चाटने चूसने लगा तो मेरे मुँह से भी कामुक सिस्कारियां निकलने लगी. कुछ देर तक चूसने के बाद ही मेरी चूत बुरी तरह गरम हो गयी. मेरी चूत मैं जैसे हजारो कीड़े रेंगने लगे. मैंने जब नीम की ओर देखा तो पाय उसका भी ऐसा ही हाल था. मेरे कहने पर वीनय ने मेरी चूत चाटना बंद कर दीया. एक एक मेरी निगाह अजय के लंड की ओर गयी, जीसे थोड़ी देर पहले नीमा चूस रही थी. लंड उसके मुँह के अंदर था इसलिए मैं उसे ठीक से देख नहीं पाई थी.



अब जब मैंने अच्छी तरह देखा तो मुझे अजय का लंड बहुत पसंद आया. मेरे मन मैं कोई बुरा ख़्याल नहीं था. ना मैं वीनय के साथ बेवफाई करना चाहती थी. बस मेरा मन कर रहा था का एक बार मैं अजय का लंड मुँह मैं लेकर चूसू. यह सोच कर मैंने कहा, “यार ! क्यों ना हम चारो एक साथ मज़ा ले. जैसे ब्लू फिल्म मैं दिखाया जाता है.”



अब अजय और नीम भी मेरी ओर देखने लगे. मैं बोली, “हम चारो दोस्त हैं.

इसलिए आज अगर कोई और कीसी और के साथ भी मज़ा लेता है तो बुरा नहीं

होगा. क्यों वीनय, मैं गलत कह रही हूँ?”



“नहीं !” वो बोला, मगर मुझे लगा की वो मेरी बात समः ही नहीं पाय है. नीमा ने पूछ लीया. मैंने कहा, “मान ले वीनय अगर तेरी चूत चाटे तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिऐ. उसी प्रकार अगर मैं अजय का लंड मुँह मैं ले लूं तो बाक़ी तुम तीनो को फर्क नहीं पड़ेगा. मैं ठीक कह रही हूँ ना?”



मेरी बात का तीनो ने समर्थन कीया. मैं जानती थी की कीसी को मेरी बात का

कोई ऐतराज़ नहीं होगा. क्योंकी एक प्रकार से मैंने सबके मन की इच्छा पूरी करने की बात कही थी. सब राजी हो गई तो मैंने आईडिया दीया की बिल्कुल ब्लू फिल्म की तरह से जब मरजी होगी, लड़का या लडकी बदल लेंगे.



मेरी यह बात भी सबको पसंद आ गयी. उसी समय वीनय ने नीमा को खींचकर अपने सीने से लगा लीया और उसके सीने पर कश्मीरी सेब की तारा उभरे हुए मम्मो को चूसने लगा. और मैं सीधे अजय के लंड को चूसने मैं लग गयी. उसके मोटे लंड का साइज़ था तो वीनय जैसा ही मगर मुझे उसके लंड को चूसने मैं कुछ ज्यादा ही अनद आ रहा था. मैं मज़े से लंड को मुँह मैं काफी अंदर दाल कर अंदर बहार करने लगी. उधर नीमा भी वीनय के लींग को चूसने मैं लग गयी थी.



तभी अजय ने मेरे कान मैं कहा, “तुम्हारी चूत मुझे अपनी ओर खींच रही है. कहो तो मैं तुम्हारी चूत अपने होंठो मैं दबाकर चूस लूं?”



यह उसने इतने धीमे स्वर मैं कहा था की मेरे अलावा कोई और सुन ही नहीं सकता था. मैंने मुस्करा कर हां मैं सीर हीला दीया. वो मेरी जांघों पर झुका तो मैंने अपनी टांगो को थोडा सा फैला कर अपनी चूत को खोल दीया. वो पहले तो मेरी चूत के छेद को जीभ से सहलाने लगा. मुझे बहुत मज़ा आने लगा था. मैं उसे काट काट कर चूसने के लीये कहने वाली थी, तभी उसने ज़ोर से चूत को होंठो के बीच दबा लीया और खुद ही काट काट कर चूसने लगा. मेरे मुँह से कामुम सिस्कारियां निकलने लगी “आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ऊऊऊम्म्म्म्म्म्म्म्म् ऊऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् म्म्म्म्म्म्म्म बहुत माआया ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ाआआअ आआआ र्र्र्र्राआह्ह्ह्हाआआ ह्ह्ह्ह्हाआआईईईईइ.



अब तो मैं और भी मस्त होने लगी और मेरी चूत रस से गीली होने लगी. वो

फानको को मुँह मैं लेकर जीभ रगड़ रहा था. मैंने वीनय की ओर देखा तो पाय की वो भी नीमा की चूत को चूसने मैं लगा हुआ था. नीम के मुँह से इतनी ज़ोर से सिकारियां नीकल रही थी की अगर आस पास कोई घर होता तो उस तक आवाज़ ब्पहुंच जाती और वो जान जाते की यहाँ क्या हो रहा है.

“ख्ह्ह्हा ज्ज्ज्जाआओअऊऊऊ छूऊऊस्स्सूऊओ और्र्र्र्र्र्र्र ज़्ज़्ज़्ज़ूऊऊर्र्र्र्र्र्र्र्र्

स्स्स्स्सीईईई स्स्स्स्साआआल्ल्ल्ल्लीईईए क्क्क्क्क्कात्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त ल्ल्ल्ल्लीईईए

म्म्म्मीईर्र्र्र्रीईईई क्छ्ह्हूऊत्त्त्त्त् म्म्म्म्म्म्म्म ह्ह्ह्हाआआआईईईईईई म्म्म्म्म्म्माआज़्ज़्ज़्ज़्ज़ाआअ आआआ र्र्र्राआअह्ह्ह्ह्ह्हाआअ ह्ह्ह्ह्हाआआईईईईईइ ऊऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् ऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्”



खैर मेरी चूत को चूसते हुए जब अजय ने चूत को बहुत गरम कर दीया तो मैं जल्दी से उसके कान मैं बोली, “अब और मत चूसो. मैं पहले ही बहुत गरम हो चुकी हूँ. तुम जल्दी से अपना लंड मेरी चूत मैं दाल दो वर्ना वीनय का दील आ जाएगा. जल्दी से एक ही झटके मैं घुसा दो.”



वो भी मीर चूत मैं अपना लंड डालने को उतावला हो रहा था, मैंने अजय के साथ चुदवाने का इसलिए मन बाना लीया था ताकी मुझे एक नए तरीके का मज़ा मील सके.



उसने लंड को चूत के छेद पर रख कर अंदर की ओर धकेलना शुरू कीया तो मैं इस दर मैं थी की कहीँ वीनय मेरे पास आकर यह ना कह दे की वो मुझे पहले छोड़ना चाहता है. मैंने जब उसकी ओर देखा तो वो अब तक नीम की चूत को ही चूस रहा था. उसका ध्यान पूरी तरह चूत चूसने की ओर ही था. मैंने इस मौक़े का लाभ उठाने का मन बनाया और चूत की फानको को दोनो हाथो से पकड़ कर फैला दीया ताकी अजय का लंड अंदर जाने मैं कीसी प्रकार की परेशानी ना हो.



और जब उसने मेरी चूत मैं लंड का सुपादा दाल कर ज़ोर का धक्का मारा तो मैं सिसियाँ उठी. उसका लंड चूत के अंदर लेने का मन एक एक कुछ ज्यादा ही बेताब हो गया. मैंने जल्दी से उसका लंड एक हाथ से पकड़ कर अपनी चूत मैं डालने की कोशिश करनी शुरू कर दी. एक तरह मेरी म्हणत और दूसरी तरफ उसके धक्के, उसने एकदम से तेज़ धक्का मार कर लंड चूत के अंदर आधा पहुँचा दीया. ज्यादा मोटा ना होने के बावजूद भी मुझे उसके लंड का झटका बहुत अनंद दे गया और मैं क़मर उछाल उछाल कर उसका लंड चूत की गहराई मैं उतरवाने के लीये उतावली हो गयी.



तभी मैंने वीनय की ओर देखा. वो भी नीम को छोड़ने की तय्यारी कर रहा था. उसने थूक लगा कर नीमा की चूत मैं लंड घुसाया तो नीमा सिस्कारी लेकर बोली, “ऊईईइईईईए दया कितन मोटाआया हाआआईईईईईई. मेरी सखी देख रही है तेरे लोवर का लंड. ये तो मेरी नाज़ुक चूत को फाड़ ही देगा. ऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् गोद्द्द्द्द्द्द्द्द्द स्स्स्स्स्स्स्सीईईईईई धीईईर्र्र्रीईई

धीईईर्र्रीईए घुसाआआआआअऊऊऊओ. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है.”



वो मेरी ओर देख कर कह रही थी. उसकी हालत देखकर मुझे हंसी आ रही थी. क्योंकी मुझे मालूम था की वो जरूर acting कर रही होगी. क्योंकी वो पहले भी कयी बार चुद्वा चुकी थी. इसका सबोत ज़रा ही देर मैं मील गया, जब वो सिस्कारी लेते हुए वीनय को लंड ज़द तक पहुंचाने के लीये कहने लगी. वीनय ने ज़ोरदार धक्का मार कर अपना लंड उसकी चूत की ज़द तक पहुँचा दीया था. इधर मेरी चूत मैं भी अजय के लंड के ज़ोरदार धक्के लग रहे थे. कुछ देर बार वीनय ने कहा, “अब हम लोग पर्त्नेर बदल ले तो कैसा रहेगा?”



वैसे तो मुझे मज़ा आ रहा था, मगर फीर भी तैयार हो गयी. अजय ने मेरी चूत से लंड नीकाल लीया. मैं वीनय के पास चली गयी. उसने नीम की चूत से लंड नीकाल कर मुझे घोड़ी बनाकर मेरी पीछे से चूत मैं लंड पेल दीया, एक झटके मैं आधा लंड मेरी चूत मैं समां गया, इस आसान मैं लंड चूत मैं जाने से मुझे थोड़ी परेशानी हुई मगर मैं झेल गयेयूधार मैंने देखा की अजय ने नीमा की चूत मैं लंड घुसाया और तेज़ी से धक्के मारने लगा. साथ ही उसकी चूचियों को भी मसलने लगा. कुछ ही देर बाद हमने फीर partner बदल लीये. ऍम मेरी चूत मैं फीर से अजय का लंड था. उधर मैंने देखा की नीमा अब वीनय की गोद मैं बैठ कर उछल रही थी, और नीचे से वीनय का मोटा लंड उसकी चूत के अंदर बहार हो रहा था। वो सिस्कारी लेकर उसकी god मैं एक प्रकार से झूला झूल रही थी। मैंने अजय की ओर इशारा कीया तो उसने भी हामी भर दी. मैं उसकी क़मर से लिपट गयी.

दोनो टाँगे मैंने उसकी क़मर से लप्पेट दी थी और उसके गले मैं बाहें डाले, मैं झूला झूलते हुए चुद्वा रही थी. बहुत मस्ती भरी चुदाई थी. कुछ देर बाद लंड के धक्के खाते खात मैं झड़ने लगी, मेरी चूत मैं संकुचन होने लगा जिससे अजय भी झंडे लगा. उसका वीर्य रस मेरी चूत के कोने कोने मैं ठंडक दे रहा था, बहुत अनंद आ रहा था.
 
दोनो टाँगे मैंने उसकी क़मर से लप्पेट दी थी और उसके गले मैं बाहें डाले, मैं झूला झूलते हुए चुद्वा रही थी. बहुत मस्ती भरी चुदाई थी. कुछ देर बाद लंड के धक्के खाते खात मैं झड़ने लगी, मेरी चूत मैं संकुचन होने लगा जिससे अजय भी झंडे लगा. उसका वीर्य रस मेरी चूत के कोने कोने मैं ठंडक दे रहा था, बहुत अनंद आ रहा था.


उसके बाद उसने मेरी चूत से लंड बहार नीकाल लीया. उधर वो दोनो भी झाड़

झुदा कर अलग हो चुके थे. हम सबने खाने पीने का प्लान बनाया. दोनो समन मौजूद थे. मैं आम तौर पर नहीं पीती हूँ और ना ही नीमा पीती है, मगर उस दीन हम सबने व्हिस्की पी. खा पी चुकने के बाद हम चारो फीर मस्ती करने लगे, मस्ती करते करते ही मैंने फैसला कर लीया था की इस बार गांड मैं लंड दल्वायेंगे. जब मैंने अजय और वीनय को अपनी मंशा के बारे मैं बताया तो वो दोनो राज़ी हो गई. नीमा तो पहले से ही राज़ी थी शायद. हम सबने तेल का इंतज़ाम कीया. टेल लगा कर गांड मरवाने का यह आईडिया नीमा का था. शायद वो पहले भी इस तरीके से गांड मरवा चुकी थी.



तेल आ जाने के बाद मैंने वीनय के लंड को पहले मुँह मैं लेकर चूस कर खड़ा कीया और उसके बाद उसके खडे लंड पर तेल चुपद दीया और मालिश करने लगी. उसके लंड की मालिश करके मैं उसके लंड को एकदम चिकना बाना दीया था. उधर नीम अजय के लंड को तेल से टर्र करने मैं लगी हुई थी. वीनय मैं लंड को पकड़ कर मैंने कहा “इस बार तेल लगा हुआ है, पूरा मज़ा देना मुझे.”



“फिक्र मत करो मेरी जान.” वो मुस्कुरा कर बोला और उसने मेरी गांड के सुराख पर रगड़ता रहा उसके बाद एक ही धक्के मैं अपना आधा लंड मेरी गांड मैं दाल दीया. मेरे मुँह से ना चाहते हुए भी सिस्कारी निकलने लगी. जितनी आसानी से उसका लंड अपनी चूत मैं मैं डलवा लेटी थी, उतनी आसानी से गांड मैं नहीं.



खैर जैसे ही उसने दूसरा धक्का मार कर लंड को और अंदर करना चाहा, मैं अपना काबू नहीं रख पाई और आगे की ओर गिरी ओ वो भी मेरे साथ मेरे बदन से लिप्त मेरे ऊपर गीर पड़ा. एक एक वो नीचे की ओर हो गया और मैं उसके ऊपर, दबाव से उसका सारा लंड मेरी गांड मैं समां गय. मैं मरे दर्द के चीखने लगी. ह्ह्ह्ह्ह्हाआआईईईईई फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ाआद्द्द्द्द्द् दीईईइ

म्म्म्म्मीईर्र्र्रीईई . मैं उससे छूटने के लीया हाथ पैर मारने लगी तो उसने म,उझे खींच कर अपने से लिपटा लीया और तेज़ी से उछल उछल कर गांड मैं घुसे पडे लंड को हरकत देना स्टार्ट कर दीया.



मेरी तो जान जा रही थी. ऐसा लग रहा था की आज मेरी गांड जरूर फट

जायेगी. मैं बहुत मिन्नत करने लगी तो उसने मुझे बराबर लिटा दीया और तेज़ी से मेरी गांड मारने लगा. बगल मैं होने से वैसे तो मुझे उतना दर्द नहीं हो रहा था मगर उसका मोटा लंड तेज़ी से गांड के अंदर बहार होने मैं मुझे परेशानी होने लगी. मैं नीम की ओर नहीं देख पाई की वो कैसे गांड मरे का मज़ा ले रही है, क्योंकी मुझे खुद के दर्द से फुर्सत नहीं थी.



वीनय काफी देर से धक्के मार रहा था मगर वो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था. तभी मैंने देखा की नीमा ज़ोर ज़ोर से उछल रही थी और अजय को बार बार मुकत करने की लीये कह रही थी. कुछ देर बाद अजय ने लंड बहार नीकाल लीया. मेरे पास आकर बोला, “कहो तो लंड तुम्हारी चूत मैं दाल दूं. नीमा तो थक गयी है.”



मैंने वीनय की ओर देखा तो उसने हामी भर दी तो मैंने भी हाँ कह दीया. फीर मैं वीनय के सहयोग से उठ कर वीनय के ऊपर आ गयी, नीचे वीनय मेरी गांड मैं लंड डाले पड़ा हुआ था, ऊपर मैं चूत फैलाये हुए अजय का लंड डलवाने के लीये बेताब हो रही थी. अजय ने एक ही धक्के मैं अपना पूरा लंड मेरी चूत मैं उतार दीया. उसके बाद जब मुझे दोनो ओर से धक्के लगने लगे तो मुझे इतना मज़ा आया की मैं बता नहीं सकती. बिल्कुल ब्लू फिल्मो की तरह का सीन इस समय हो रहा था, मैं गालिया देती हुई दोनो तरफ से चुद रही थी. नीम पास खादी हम तीनो को मज़ा लेते देख रही थी. कुछ ही देर मैं हम तीनो झाड़ कर लास्ट पस्त हो गई.



सुबह तक हमने कुल मीलाकर ४ बार चुदाई का अनद लीया. उसके बाद अगले दीन मैं नीम के साथ पहले उसके घर गयी, फीर उसे अपने घर भी ले आयी. ताकी मम्मी को यकीन हो जाये की मैं रात भर उसी के घर पर थी. मम्मी को कुछ शाकुए नहीं हो पाय.



आज भी हम चारो मील कर ऐसे ही प्लंस बनाते हैं और अजय के बंग्लोव पर

चुदाई का अनंद उताते हैं, अब तो उसमें वीनय के २-३ दोस्त और भी शम्मिल हो गई हैं......

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