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Saturday, August 21, 2010

doosre se chudwai ka aanand - true story,part 1.

यह सच्ची बात है, सिर्फ नाम अलग हैं, करीब ४ वर्ष पहले हमलोगों ने एक बड़ा ही नया अनुभव किया, आज अन्तर्वासना पर इतनी कहानिया पढने के बाद सोचा की मन की बात बता ही दूं , कुछ विवरण और वार्तालाप थोड़े काल्पनिक है इस कहानी को इंटरेस्टिंग बनाने के लिए लेकिन हुआ सब कुछ वैसा ही जो लिखा है, हमारा सेक्सुअल जीवन काफी आनंदमय था और शादी के इतने सालों बाद बहुत ही खुल गए थे और शादी के १४ वर्षों के बाद नए तरीको से सेक्स जिंदगी को आनंदमय बनाने का प्रयास करते जैसे की पत्नी का कभी कभी अंग प्रदर्शन , साथ ब्लू फिल्म्स देखना , जब घर मैं अकेले हों तो नंगा रहना और वैसे ही खाना खाना साथ म॓, देर रात को अँधेरे बालकोनी म॓ पत्नी का लगभग नग्न साथ बैठना इत्यादि. हम सम्भोग के समय बिलकुल खुली बातें करते, तीसरे पुरुष और इस्त्री के बारे में फंतासी करते, एक दुसरे को प्यार भरी गंदी गालिया देते और एक दुसरे के अंगो के लिए गंदी बातें करते. लेकिन कभी भी हमने तीसरे पुरुष या इस्त्री के साथ सेक्स करने के लिए प्रयास नहीं किया, हम ऐसे ही बहुत खुश थे. हम कभी कभी रात को खाने के बाद गाडी में दूर तक चक्कर लगाते और शहर के बहार हाईवे पर जाते, शहर का नाम नहीं बताऊँगा. पत्नी जो की काफी भर पुरे शरीर की है और स्तन जिसके ज्यादा बड़े तो नहीं लेकिन बहुत ही गुदाज और उन्नत है, मेरे कहने पर ब्लौसे से निकाल लेती और उनकी घुंडियों तक उन्हें बाहर कर लेती, हमे एक अजीब प्रकार का आनंद प्राप्त होता यह सोच कर की नजदीक से गुजर्नेवालों की नजर उन स्तनों पर पड़ती है और मेरी पत्नी और मैं दोनों सेक्स की गर्मी महसूस करते और घर आकर बहुत ही रोमांचक चुदाई का मजा लेते. एक दो बार हमने देखा की बाहर सड़क पर चलने वालो की नजर पत्नी के अर्ध्खुले स्तनों पर पड़ी तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी. पत्नी के उरोज तो उन्नत थे ही, सबसे ज्यादा सेक्सी थी उसकी जांघे और मोटे नितम्ब, जांघ जैसे की मोटे शिला की तरह बिलकुल चिकनी गोरी और नितम्ब ३९ इंच. उन कूल्हों को देख कर किसी का भी मन ख़राब हो जा सकता है आज भी . एक दिन देखा कि एक चने वाला अपना सामन समेट कर जाने ही वाला था तभी पत्नी ने कहा की हम चना खायेंगे , मैंने गाडी रोकी और उससे मसाला चना लिया जो की काफी स्वादिस्ट था, मैंने पुछा की क्या रोज यहाँ आते हो तो उसने बताया की करीब दो हफ्ते से ठेला यहाँ लगा रहा हूँ उसके पहले कहीं दूसरी जगह लगाता था. चने वाला अंदाज़ 35 एक साल का होगा लेकिन शरीर से हट्टा कट्ठा था और बहुत ही साफ़ सुथरा जैसे की रोज शरीर पर तेल मालिश करता हो कुछ कुछ पहेलवानो जैसा सुडौल शरीर, मैंने नाम पुछा तो बताया सरजू , हम चना लेकर चले आये, रात को जब पत्नी के साथ सम्भोग करते हुए उस चने वाले की याद आयी , पुछा सरजू कैसा लगा, पत्नी ने कहा फालतू की बातें मत करो और हंसने लगी, मैंने कहा कल जब जायेंगे तो उसे भी अपने उरोजों के दर्शन कराना पागल हो जाएगा, पत्नी ने कहा चलती गाडी में बात और है, गाडी रोक कर मैं अपने चूचो को नहीं दिखाऊंगी, कोई गड़बड़ हो गयी तो क्या होगा, मैंने कहा की क्या उसका शरीर तुम्हे मस्त और मजबूत नहीं लगा तो वोह मुझे चूमने और काटने लगी, मैं जानता था की उस दिन की बात याद कर के उसे मजा आ रहा था. हम दो तीन दिन बाद फिर उस तरफ निकले , पत्नी से मैं कहा की तुम्हारी सबसे छोटी और काली वाली जालीदार ब्रा पहनो , पत्नी ने पहेन तो लिया पर चूचो को दिखाने से मना कर दिया कहा गाडी रोके कर ऐसा करना खतरनाक होगा, मैंने कहा चलो तो, जाते हुए देखा की चने वाला ठेला लगाये खड़ा था, लौटते हुए मैंने पत्नी से कहा की अपने चूचे बहार कर ले पहले तो तैयार नहीं हुई पर जोर देने पर मान गयी, कहा की अगर वहां भीड़ होगी तो नहीं खोलेगी, पत्नी अपनी चूचियों को बाहर कर लेती थी लेकिन उसपर साड़ी का पल्लू ढांप कर रखती थी और जब भी मौका दीखता साड़ी का पल्लू हटा अपने उरोजों का प्रदर्शन करती , अगर भीड़ बहुत होती तो फिर से ढक लेती, मैंने दूर से देखा की ठेले पर कोई नहीं है और सिर्फ चने वाला और उसके साथ एक छोटा लड़का खड़ा है , रौशनी भी वहां ज्यादा नहीं थी, पत्नी ने झिझकते हुए अपने स्तनों को ब्रा से निकाल बाहर किया और साड़ी के पल्लू से ढक लिया, मैंने गाडी रोकी और चने वाले को बुलाया नजदीक, और पत्नी को इशारा किया, पत्नी ने थोडा सा पल्लू हटाया और किनारे से उसके गोरे गोरे बाएँ तरफ के उरोजों ने हलकी सी झलक दी शायद चने वाले ने भी देखा ऐसा तीन चार बार हमने किया और धीरे धीरे पत्नी ने अपने उरोजों पर का पल्लू करीब करीब एकदम ही हटाना शुरू कर दिया, अब उसके अर्ध नंगे गोरे और ऊंचे स्तन साफ़ दीखते थे, दिखावा ऐसे करती थी जैसे उसे पता ही नहीं और पल्लू खिसका गया हो, शायद चने वाला कुछ कुछ समझ रहा था. अब जब भी गाड़ी वहां खडी करता चने वाला दौड़ा आता और चने देने के बहाने वहां खड़ा होकर मेरे और पत्नी से इधर उधर की बातें करने लगता, हम भी थोडा निडर हो गए और आनंद लेने लगे . पत्नी की झिझक कम हो रही थी. वोह पहले से ज्यादा उरोजों का प्रदर्शन चने वाले के लिए करने लगी, अब तो लगभग एक तरफ के चुचों को पूरा ही बाहर निकाल कर उसे दिखाने लगी, चने वाले का ठेला उस तरफ ही होता था जिस ओर पत्नी बैठती थी यानि की पत्नी की बायी ओर. चने वाला भी अब समझ गया था . मैं और पत्नी चुदाई का बहुत मज्जा ले रहे थे , सरजू का जिक्र होते ही पत्नी गरम हो जाती थी और मैंने देखा उसकी बूर पानी से भर जाती थी, मुझे दातों से काटने लगती और सिसकारी भी लेती, हालाकिं किसी दुसरे समय बात करता तो मुझपर गुस्सा दिखाती, एक दिन जब गाडी रोकी तो देखा की सरजू चने लेकर आया और उसने पत्नी की ओर का दरवाजा खोल कर चने पत्नी और मेरे हाथ में दिया, पहले वो खिड़की से ही देता था, मैंने कुछ नहीं कहा, वो पत्नी से काफी सटकर खड़ा था, अब वो दो मतलबी भाषा में भी बोलने लगा और पत्नी को सीधा ही संबोद्धित करता , जैसे एक दिन बोल पड़ा मेमसाब मेरा चना आपके लिए स्पेशल तैयार किया है गरमा गरम दिखाऊँ क्या, हम सभी इसका मायने समझ रहे थे पर पत्नी ने अनजान होकर कहा अभी नहीं कल दिखाना अभी भूख नहीं है, दो या तीन दिन बाद हम फिर वहां गए, अब मेरी पत्नी भी इस अनुभव का बहुत मजे से आनंद लेने लगी थी, हम ध्यान रखते थे की उसके ठेले पर जब भीड़ नहीं हो तभी वहां गाडी लगायें, उसदिन पत्नी ने ब्रा नहीं पहनी, और ब्लौसे के ऊपर के तीन बटन खोल लिए, मैंने गाडी रोकी तो सरजू नजदीक आया और पत्नी की ओर का दरवाजा खोला, हमने देखा की उस समय उसने धोती सामने से चौड़ी कर ली थी थी और उसका ब्लू रंग का जांघिया साफ़ दिख रहा था जिसके किनारे से उसने अपने लंड का आगे का हिस्सा निकाल रक्खा था और उसका सुपाडा दीख रहा था, बिलकुल लाल, मेरी पत्नी ने साड़ी का पल्लू खिसकाया तो उसके दोनों स्तन ब्लौस के बहार फूलेसे निकल पड़े, सरजू आँख फाड़ कर देखता रहा, पत्नी धीरे से मुस्कुरा रही थी और पूरे ही स्तनों को प्रदर्शित कर दिया, मुस्कुराते हुए पुछा तुम्हारा गरम चना तैयार है तो क्यों नहीं खिलाते मैं भी देखूं की कितना गरम है, सरजू को अब स्पस्ट इशारा मिल गया था, हम तीनो ही अब बेबाक हो गये थे सरजू मेरी उपस्थिती से बेफिक्र था, मैं भी सेक्स और वासना के पीछे दीवाना हो गया था, सरजू बोला मेमसाब आपके सामने ही है, आप खुद ही देख लीजिये और उसने पत्नी के हाथों को पकड़ लिया और अपने जांघिये के पास लाकर अपने लंड को पकड़ा दिया, पत्नी सन्नाटे में थी, उसने ऐसा सोचा नहीं था की गैर मर्द का लंड भी पकड़ लेगी, उसने हाथ हटा लिया, मैंने हिम्मत देते हुए कहा की चना खाना है तो देखना तो होगा ही कैसा है, घबराओ नहीं, पत्नी का गला सूख गया, उसकी आवाज नहीं निकल रही थी, हम लोग मजाक में ही बहुत आगे बढ़ चुके थे, पत्नी ने कहा घर चलो, फिर आयेंगे, मैंने सरजू से कहा की कल आएंगे और चल पड़े, सरजू थोडा उदास दिखा. कुछ दिन हम नहीं गए लेकिन अन्दर से पत्नी और मैं दोनों ही दुबारा ऐसा हो ऐसा चाहते थे, एक दिन पत्नी से फिर कहा तो बोली ठीक है लेकिन मैं उसका लिंग नहीं पकडूंगी मैंने कहा ठीक है लेकिन अगर वो तुम्हारे बोबे छूना चाहे या दबाये तो मना मत करना, देखूँगी कह कर वो तैयार हो गयी, लौटे हुए हमने देखा सरजू के ठेले के पास कोई नहीं, हम रुक गए, उसे अव्वाज़ दी तो आया, मैंने कहा आज चने नहीं खिलाओगे तो सरजू बोला आप नाराज है साब, हम कैसे अपनी मर्जी से आपको और मेमसाब को चना खाने बोल सकते हैं, आपको चाहिए तो अभी ले कर आता हूँ, मैं इशारा किया और सरजू चने लेन गया तो पत्नी से कहा की क्यों मुझे और उस बेचारे को तडपाती हो, अन्दर से मन पत्नी का भी था, बिना बोले उसने अपने ब्लौसे खोले और स्तनों को बाहर निकाला और पल्लू ढक कर बैठी रही, इसी बीच सरजू आया तो मैंने चने लिए और उससे कहा मेमसाब को तुम्हारे चने अच्छे लगते हैं लेकिन डरती हैं की ज्यादा लेने से नुक्सान होगा, सरजू समझ रहा था, पत्नी का चेहरा लाल हो गया, वो शर्मा रही थी, सरजू बोला आप चिंता न करें साब, हम भी अच्छे लोग हैं आपकी इज्जत मेरी है, मेमसाब का मन नहीं तो उन्हें कुछ ना कहें लेकिन मेरे ठेले पर आते रहिएगा कहकर पत्नी के गालों पर धीरे से हाथ लगाया और लौटने लगा, पत्नी जैसे पिघल गयी, वो तैयार ही थी लेकिन उसे अन्दर की झिझक थी, उसने सरजू को आवाज़ दी ,सुनो, तुम्हारे ये चने ठन्डे हैं, मुझे गरम चने दो, सरजू वापस मुड़ा और आकर दरवाज़ा खोल पत्नी से सट के खड़ा हो गया, पत्नी ने किनारे से साडी खिसकाई और पल्लू खींच अपने दोनों उभार उसे दिखाए, मेरी तरफ सरजू ने देखा तो और मुझे चुप चाप देखता पाकर उसने धीरे से एक हाथ पत्नी के उरोजों पर रख कर हलके से उठाया और दबा दिया, पत्नी ने पल्लू ऊपर कर अपने चूचो को ढक लिया, कुछ शर्म से और इसलिए की किसीको को अनायास दिखे नहीं, मेरा हथियार दवाब से फटने को तैयार था, जैसे की पेंट फाड़ कर बाहर निकल जायेगा, उधर पत्नी का पूरा शरीर थरथरा रहा था, वोह बहुत धीमे आवाज़ में कुछ बडबडा रही थी, सरजू झुका और पल्लू में सर घुसा कर पत्नी के चूचो को चूस लिया, पत्नी ने हलकी सिसकार मारकर उसका मुह अपने चुचों से अलग किया. सरजू ने पत्नी की जन्घो को हलके से दबा दिया और उठ खड़ा हुआ. वो बहुत गरम हो गयी थी, मैंने सरजू से कहा कल आयेंगे और गाडी शुरू करदी, उस रात खूब जमकर चुदाई हुई, पत्नी खुल कर सरजू की बातें कर रही थी और बहुत मजा ले रही थी, मुझे भी गजब का आनंद आ रहा था, हम दो दिन तक नहीं जा सके, पत्नी हर समय उसकी बातें करना चाहती थी मुझे लगा अब उसे अपने पर कण्ट्रोल नहीं है, तीसरे दिन पत्नी शाम को तैयार थी, उसने अन्दर जिप वाली ब्रा और पेंटी पहनी थी, हम सरजू के ठेले पर पहुंचे तो वहां कुछ लोग थे, मैंने सरजू को इशारा किया हम थोड़ी देर में लौटते हुए आते हैं, वापस आने तक हम येही प्लान करते रहे क्या करना है, पत्नी अब सरजू के साथ मस्ती के लिए तो तैयार थी लेकिन एक लिमिट के अन्दर सोचा जो होगा देखा जाएगा, सरजू के शरीर ने पत्नी को आकर्षित किया और जब एक सामाजिक दाएरे के बाहर चोरी चोरी किस्म का सेक्स होता है तो बहुत एक्सैत्मेंट होती है, और यहाँ तो मैं साथ था जिसके कारण पत्नी और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी,

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